Thursday, April 19, 2012

online

पन्द्रह साल बाद मिले भी तो ऑनलाइन
वो देख नहीं पा रहे थे एक दूसरे को...
तो कहना भी आसान हो गया
वो जो पन्द्रह साल मे नहीं कह सका था वो
एक सांस मे कह गया
तुम्ही थी वो
जिसके किस्से सुनाया करता था तुम्हे
तुम्हारा राज़ जो महफूज़ था
वो दे दिया तुमको
चलो अब दफन कर दो सब
कहानी ख़त्म हो जाये .....

shifalee

Friday, December 31, 2010

आज की रात 12 बजते ही
हमारी तरह
मोबाइल भी हो जायेगा पागल ....
बार बार बजेगा
मुबारकेंआयेंगी दूर दूर से इस ताकीद के साथ
कि बदल गया है साल,
कल फिर सुबह होगी
साल के 365 दिनों में
बदलता हुआ सिर्फ एक दिन हमें लगेगा खास
कुछ बदलाव भी होंगे
बदलेगा घर की दीवार पर लगा कैलेण्डर
तारीख महीने की कतार में
साल के खाने में होगा बदलाव
ज्योतिषी बारहखानें बाँचकर
फिर लिखेंगे नये साल का नया फलसफ़ा
पर जहाँ रुका है वक्त,रुका ही रहेगा...
फिर चाहे बदल गया हो साल
टूटे रिश्तों की दरार वक्त के साथ
हो जायेगी कुछ और गहरी
जो छूट गये वो छूटे ही रहेंगे इस साल भी
तारीखें भी भूले मेरे पिता
इस बार भी नहीं जान पायेंगे वक्त का रद्दोबदल
नया साल,नई उम्मीदें,नई सुबह,नया सूरज
मन का भरम है,सब
एक दिन बाद होगी
फिर वहीं पुरानी कहानी
फिर वही जूझती घिसटती दोपहर
रोती सिसकती रात......
चंद घँटो में खत्म हो जायेगी
नये बरस की नई शाम......
शिफाली

Thursday, November 18, 2010

कल रात सपने में पापा के पाँव देखे

वो पाँव, जिनसे उन्होंने जिंदगी के ७० बरस पार कर लिए

जाने कितने रस्ते नापे....वो पैर ही तौ थे साथ

जब छूटा पापा का घर , शहर छूटा...,

पूरी जिंदगी भागते रहे उनके पैर ...हमारे लिए....

तब भी जब खुद अपने पैरों पर खड़े हो चुके थे हम,

लेकिन वो पैर एक दिन थम गए

वों अस्पताल था

याद करती हूँ

उस ज्योतिष ने पैर देख कर ही तौ कहा था...,उम्र लम्बी है पापा की

पर पापा बहुत थक गए थे.............सो गए.....

Wednesday, August 18, 2010

की इस छोटी सी दुनिया मे सभी क्यों कर नहीं अपने ,

जो रिश्ते हैं ,जो नाते हैं

की वो सब हो गए सपने ,

ये किस गुरुर ने अपनों से तनहा कर दिया हमको

ये क्या गुरुर है सारा जहाँ ठुकराए बैठे हैं।

यूँ ही लिख डाला.....कोई ख्याल इस तरह उतर गया..अब आपकी नजर है...............

Thursday, June 24, 2010

बहुत छोटी सी हसरत है,

खुदाया पूरी कर दो ना

सुबह जब नींद से जागूँ

तौ ख्वाबों मे सवेरा हो ..................

Monday, December 28, 2009


उसे दिन रात पड़ती हूँ....'
उसी मे गुम सी रहती हूँ
वो एक नादान सपना सा
मेरे घर बन के आया जो
कोई भगवान् ,अपना सा

वो जागे तब सुबह होती
जो सोये रात होती है
वो हर मसले का हल जैसे
उम्मीदों का हो कल जैसे
मै जब भी ज़िदगी की मुश्किलों से हार जाती हूँ
वो उसकी नीमकश आँखें
मुझे कहती हैं जीना है !!
ज़माना कितने गम दे दे
मेरी खातिर वो पीना है
भरोसा रख, की तेरे ही भरोसे दुनिया मे आया
के जिसने के कल की बेटी और बहन को माँ बनाया है
यही है मेरा सरमाया,
ये मेरी कोख का जाया......
जिसे दिन रात पढ़ती हूँ.......!!!!!

Wednesday, December 23, 2009

किसी ने भाई को खोजा
किसी ने बाप का साया
किसी ने प्यार साजन का
मेरे संसार मे पाया
कोई जब हो गया आहत
यहाँ पहुंचा मिली राहत
कोई था दूर सपनो से
कोई हैरान अपनों से
उन्ही मे से हैं कुछ आज
जैसे गीत के संग साज़
वो आकर जब इक्कठे हों
ठिठोली ,हंसी ठठे हों
सभी आज़ाद होते हैं
यूँ हम आबाद होते हैं
नहीं हम कुछ भी हैं वरना
हुआ जीना ,की जयूँ मरना
मगर अब हमने है जाना
हमारी भी क्या हस्ती है
है इक वीरान दिल लेकिन
उसी मे खूब मस्ती है
अकेले मुझमे शामिल
वाह, कितने लोग रहते हैं
रहीं ख्वाइश अधूरी जो
तो ये तो योग रहते हैं
हमारी कुंडली नीची
हैं रेखाएं कटी सारी
तभी तो भाग्य से पायी
ना उम्मीदी औ लाचारी
खुदा तू इस तरह से
किसी को लाचार मत करना
सुनो लाचार लोगों
तुम किसी से प्यार मत करना
.............................................................अनिल गोयल
ऐसी ही है अनिल जी की दुनिया...,है इक दिल जिसमे शामिल जाने कितने लोग रहते हैं...उन्ही बेगानों अपनों के नाम कोई पांच साल पहले लिखी उनकी ये नज़्म मेरे हाथ लग गयी...कई साल तक डायरी मे महफूज़ रही .......पर अब आपकी नज़र है......